दीर्घायु
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दीर्घायु

By: डॉ अिवनाश शंकर,
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धरती पर जीवो ंका उदय पौधा एवं जंतु के प म आ जो आपस म एक दूसरे पर आि त एवं सम ियत है ।जंतुओ ंम मानव को कृ ित का अित िवकिसत प माना है िजसके जैव ि यायो ंका संर ण ,िनयमन एवं स ालन पादप अपने िविभ पो ंम करता है यथा- भोजन ,औषि आिद के प म । ेक सजीव के अपने जैव ि या एवं दैिनक िनदान हेतु ऊजा की आव कता होती है जो पोषक त ो ंके हण ,संवहन एवं चयापचय से ा होता है ।

Product Details

  • Format:Hardback
  • Edition:2019
  • Publisher:Mahi Publication
  • Language:English
  • ISBN10:978-93-89339-21-5

Product Description

धरती पर जीवो ंका उदय पौधा एवं जंतु के प म आ जो आपस म एक दूसरे पर आि त एवं सम ियत है ।जंतुओ ंम मानव को कृ ित का अित िवकिसत प माना है िजसके जैव ि यायो ंका संर ण ,िनयमन एवं स ालन पादप अपने िविभ पो ंम करता है यथा- भोजन ,औषि आिद के प म । ेक सजीव के अपने जैव ि या एवं दैिनक िनदान हेतु ऊजा की आव कता होती है जो पोषक त ो ंके हण ,संवहन एवं चयापचय से ा होता है ।

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डॉ अिवनाश शंकर

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